पिता बीमार हैं,
बेटी को लग रहा है कि उनकी देखभाल ठीक तरह से नहीं हो रही, उन्हें अपने घर लाना
चाहती है, लेकिन डरती है, उसके घर अगर कोई ऊंच-नीच हो गई तो भाई क्या कहेंगे। होने
को तो कुछ वहां भी हो सकता है लेकिन वो तो उनके घर का मामला होगा ना।
पढ़े-लिखे आधुनिक
ख्यालातों वाले परिवार में पली उस लड़की को सपने देखने से किसी ने नहीं रोका। उसे
हर वो सुख-सुविधा दी गई जो उसके भाई को मिली, पढ़ने की, खेलने-कूदने की, अपना
करियर चुनने की, अपना जीवनसाथी चुनने की। मां-बाप ने ये भी पहले ही जता दिया है कि
उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा बेटी का होगा। बच्चों को पालने का ये आदर्श तरीका है
जिसे पूरे समाज के लिए अनुकरणीय माना जाना चाहिए।








