मामूली परिचय के
आधार पर उनके यहां पहली बार जाना हुआ था। लिविंग रूम के एक कोने में बेहद कलात्मक
से उस शेल्फ पर अंग्रेज़ी की तत्कालीन बेस्ट सेलर किताबें सलीके से रखी थीं।
किताबें मुझे त्वरित मुखर बनाती हैं, औपचारिकता की कई सीढ़ियां एक साथ फर्लांग मैं
चिहुंकने लगी।
“कोईलो की ‘द विनर स्टैंड्स अलोन’ इतनी डिप्रेसिंग है, मुझे
तो कोई खास पसंद नहीं आई। कोईलो की लिखी मेरी पसंदीदा किताब वैसे भी ‘वेरोनिका डिसाइड्स टू डाई’ है, ‘ऐल्केमिस्ट’ नहीं।“
“ख़ालिद हुसैनी की ‘अ थाऊज़ैंड स्प्लेनंडिड
सन्स’ के बाद ये दूसरी किताब थोड़ी रिपीडेट सी है, आपका क्या ख्याल है?”








